दिल्ली में हॉब रिपेयर और सर्विस
विज़िट चार्ज ₹149 है। काम शुरू करने से पहले टेक्नीशियन फ़ॉल्ट देखकर खर्च बताता है, और पैसे काम पूरा होने के बाद ही लिए जाते हैं।
किचन के काउंटर में लगा बिल्ट-इन हॉब क्लिक करता है पर जलता नहीं, लौ बुझ जाती है या काँच चटक गया है? दिल्ली में हमारा टेक्नीशियन घर आकर हॉब को काउंटर से निकालता है, वहीं ठीक करता है, वापस लगाता है और हर जोड़ की लीक-जाँच करके जाता है। हॉब कहीं वर्कशॉप नहीं जाता।
बुकिंग फ़ॉर्म अंग्रेज़ी में है: बस नाम, मोबाइल नंबर और पता भर दें। बाकी बात हमारी टीम फ़ोन पर हिंदी में कर लेगी।
दिल्ली में
दिल्ली में डीडीए फ़्लैट, बिल्डर फ़्लोर और पुरानी कॉलोनियों के मकान, सबके किचन अलग हैं; बहुत से घरों में अब पाइप वाली गैस (PNG) आती है।
दिल्ली के बहुत से घरों में अब IGL की पाइप वाली गैस आती है, इसलिए हॉब की हर सर्विस में यह भी देखा जाता है कि उसके जेट उसी गैस के हैं जिस पर वह चल रहा है।
PNG पर चलता हॉब
पाइप वाली गैस का दबाव सिलिंडर की गैस से अलग होता है, और दोनों के जेट के छेद भी अलग नाप के होते हैं। LPG वाले जेट के साथ हॉब PNG पर चले तो लौ छोटी और कमज़ोर रहती है, कोई बर्नर बार-बार बुझता है और खाना देर से पकता है। कई कंपनियाँ हॉब के साथ PNG जेट का सेट देती हैं; न हो तो उसी मॉडल के नाप के जेट लगाए जाते हैं। जेट बदलने के बाद हर बर्नर की लौ सेट होती है और हर जोड़ की लीक-जाँच।
मीटर से हॉब तक, किसका क्या काम
PNG का मीटर, मेन वाल्व और किचन तक की पक्की पाइपलाइन गैस कंपनी (IGL) की होती है, और उन पर कोई भी काम सिर्फ़ IGL करता है। किचन के वाल्व के आगे हॉब तक का कनेक्शन, हॉब के जेट, इग्निशन और बर्नर हमारा काम है। किचन नया बनवाते समय वाल्व की जगह हिलानी हो, तो पहले IGL से बात करें।
बिल्डर फ़्लोर के मॉड्यूलर किचन
लाजपत नगर, कालकाजी या प्रीत विहार जैसे इलाक़ों में पुराने मकान की जगह बने बिल्डर फ़्लोर में हॉब शुरू से लगा मिलता है। ऐसे हॉब में ज़्यादातर दिक्कत इग्निशन के तार, ढीले नॉब या उबलकर गिरे दूध से बंद जेट की होती है, और यह सब हॉब बदले बिना ठीक हो जाता है।
दिल्ली के इन इलाक़ों में भी आते हैं
मयूर विहार फ़ेज़ 1 · लक्ष्मी नगर · लाजपत नगर · साकेत · कालकाजी · द्वारका सेक्टर 10 · वसंत कुंज · प्रीत विहार
और दिल्ली के बाकी इलाक़ों में भी: कुल 145 इलाक़े।
हम क्या-क्या ठीक करते हैं
ऑटो-इग्निशन
नॉब घुमाने पर टिक-टिक होती है पर आग नहीं पकड़ती, या किसी एक बर्नर पर चिंगारी ही नहीं आती। अक्सर स्पार्क पिन पर जमी चिकनाई या नमी, ढीला तार, या इग्निशन मॉड्यूल की ख़राबी। बैटरी वाले हॉब में पहले बैटरी देखी जाती है।
कम, पीली या एक तरफ़ जलती लौ
बर्नर के छेद और जेट में दूध, चाय या तेल जम जाता है। बर्नर और जेट साफ़ करके, कैप ठीक से बिठाकर लौ फिर से नीली और बराबर।
नॉब छोड़ते ही आग बुझ जाना
ऐसा अक्सर फ़्लेम फ़ेल्योर डिवाइस (थर्मोकपल) की ख़राबी से होता है। उसकी जाँच, सफ़ाई और ज़रूरत हो तो बदलना। इसे हटाकर हॉब चलाना ख़तरनाक है, हम ऐसा नहीं करते।
टूटा या चटका काँच का टॉप
मॉडल नापकर उसी नाप का टफ़न ग्लास लगाना। ग्लास की कीमत ऑर्डर से पहले बताई जाती है।
नॉब ढीला, जाम या घूमता नहीं
नॉब बदलना और वाल्व की जाँच। वाल्व खोलने और ग्रीस करने का काम सिर्फ़ टेक्नीशियन का है।
नया हॉब लगाना या बदलना
मॉड्यूलर किचन में नए कट-आउट पर फ़िटिंग, पुराने कट-आउट में नया हॉब, LPG से PNG के जेट बदलना, और हर जोड़ की लीक-जाँच।
बुकिंग से काम पूरा होने तक
- बुक करें या कॉल करें: फ़ॉर्म भरें, कॉल करें या WhatsApp पर लिखें: उपकरण, ब्रांड और क्या दिक्कत है।
- टेक्नीशियन घर आता है: तय समय पर, ज़रूरी औज़ार और आम पार्ट्स साथ लेकर।
- पहले जाँच, फिर खर्च: फ़ॉल्ट देखकर वह बताता है कि क्या करना है और कितना लगेगा। आपकी हाँ के बाद ही काम शुरू।
- काम के बाद पेमेंट: काम पूरा होने और आपके चलाकर देख लेने के बाद ही पैसे। कोई एडवांस नहीं।
गैस की सुरक्षा सबसे पहले
- गैस की गंध आए तो कोई स्विच न दबाएँ, न लाइट जलाएँ न बुझाएँ, माचिस या लाइटर बिल्कुल नहीं। सिलिंडर का रेगुलेटर या PNG का वाल्व बंद करें, खिड़की-दरवाज़े खोलें, सबको बाहर ले जाएँ और बाहर से फ़ोन करें: LPG के लिए 1906, पाइप वाली गैस के लिए अपनी गैस कंपनी का इमरजेंसी नंबर (बिल पर लिखा होता है)।
- काँच चटक गया हो तो उस हॉब पर खाना न बनाएँ; गैस बंद रखें और टेक्नीशियन बुलाएँ।
- हॉब के नीचे बंद कैबिनेट में सिलिंडर न रखें, और वहाँ बिजली का सॉकेट न हो। बार-बार नॉब घुमाकर जलाने की कोशिश न करें: बिना जली गैस किचन में भरती है।
सभी ब्रांड, पर किसी कंपनी का अधिकृत सेंटर नहीं
हम एक स्वतंत्र सर्विस सेंटर हैं और हर ब्रांड का काम करते हैं, पुराने मॉडल भी। हम किसी कंपनी के अधिकृत (authorised) सर्विस सेंटर नहीं हैं और ऐसा कभी नहीं कहते। जहाँ कंपनी असली पार्ट देती है वहाँ वही लगाते हैं, और दूसरा पार्ट लगाना हो तो पहले बता देते हैं। अगर उपकरण अभी कंपनी की वारंटी में है, तो पहले कंपनी की सर्विस लाइन पर बात करें।